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यूपी पंचायत चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ही बढ़ी उम्मीदवारों में हलचल, गली-गली पहुंचने लगे प्रत्याशी

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发表于 2025-11-27 00:05:02 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

यूपी पंचायत चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ही बढ़ी उम्मीदवारों की हलचल।



जागरण संवाददाता, गाजीपुर। पंचायत चुनाव की तिथि अभी सरकारी फाइलों में उलझी हुई है, लेकिन गांवों में चुनावी माहौल पूरी तरह बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में गली-कूचों से लेकर चट्टी-चौराहों तक ऐसी हलचल बनी है, जैसे चुनाव की घोषणा किसी भी क्षण होने वाली हो। लोगों की रोजमर्रा की बातचीत में अब चुनाव प्रमुख मुद्दा बन चुका है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

तिथि घोषित न होने के बावजूद जिला पंचायत सदस्य, प्रधान और बीडीसी पद के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। प्रत्याशियों के बीच यह धारणा मजबूत है कि तारीख घोषित होने में हो रही देरी उनके लिए अतिरिक्त प्रचार का अवसर साबित हो रही है।

इसी विश्वास के साथ वे गांव-गांव, घर-घर संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक गांवों की गलियों में उम्मीदवारों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है।

ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सबसे अधिक चहल-पहल मतदाताओं के दरवाजों पर दिख रही है। चट्टी-चौराहे व चाय दुकानों पर प्रत्याशियों की उपस्थिति सामान्य दृश्य बन गई है। चुनावी मैदान में इस बार न सिर्फ पुराने नेता, बल्कि पहली बार भाग्य आजमाने वाले युवा और महिलाएं भी मजबूती के साथ प्रचार में उतरी हैं।

ग्रामीण महिलाओं में भी राजनीतिक सक्रियता उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। महिला सीटों वाले क्षेत्रों में दावेदार घर-घर जाकर जनसमर्थन जुटा रही हैं। कहीं चाय-पानी की बैठकी हो रही है, तो कहीं दरवाजे पर अलग-अलग मुद्दों पर लंबी बातचीत का दौर चलता है।

गांवों में चुनावी रंगत इतनी गहरी हो चुकी है कि मौसम का प्रभाव भी प्रत्याशियों की रफ्तार को थाम नहीं पा रहा। प्रतिदिन छोटी-छोटी टीमों में समर्थक गांव के कोने-कोने तक पहुंच रहे हैं।

स्थिति यह है कि तिथि चाहे जब घोषित हो, चुनाव प्रचार गांवों में पहले ही पूरी गति पकड़ चुका है। ग्रामीण जनजीवन पर चुनावी हलचल का असर साफ दिखाई देने लगा है, और हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है, तारीख कब आएगी?
बीमार हो या बारात हर जगह उम्मीदवार मौजूद

पंचायत चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की सक्रियता ऐसी बढ़ी है कि गांव में किसी के घर दुआर खाली नहीं दिख रहा। क्षेत्र में कोई बीमार पड़े या किसी के यहां मौत हो जाए, उम्मीदवार ऐसे दौड़े चले आते हैं जैसे सबसे बड़ा दर्द उन्हें ही हो। शादी-ब्याह के हाल भी जुदा नहीं हैं। नात-रिश्तेदारों से ज्यादा भीड़ अब उम्मीदवारों की दिख रही है।

बारात में नाच-गाना कम, चुनावी परिचय ज्यादा हो रहा है। पत्तल पर पूड़ी-सब्जी से पहले प्रत्याशी अपनी मुस्कान और आशीर्वाद मांगने की थाली परोस देते हैं।
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