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दिल्ली HC का अहम फैसला, अपराध की आय के रूप में ईडी कुर्क कर सकती है अवैध सट्टेबाजी से अर्जित संपत्ति

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发表于 2025-11-27 00:14:33 | 显示全部楼层 |阅读模式
  



विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। सट्टेबाजी की आय से अर्जित संपत्ति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल व न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि भले ही क्रिकेट सट्टेबाजी मनी लांड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट 2002 (पीएमएलए) के तहत एक अपराध नहीं है, फिर भी अवैध सट्टेबाजी से अर्जित संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अपराध की आय के रूप में कुर्क किया जा सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

याचिकाकर्ता नरेश बंसल एवं अन्य की याचिका पर पीठ फैसला सुनाया कि जालसाजी, धोखाधड़ी और षडयंत्र जैसे आपराधिक कृत्यों का उपयोग करके सट्टेबाजी से अर्जित धन पीएमएलए की धारा 2(1)(यू) के तहत अपराध की आय है।

पीठ ने ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के माध्यम से कोई अचल संपत्ति अर्जित करता है और बाद में ऐसी संपत्ति का उपयोग रियल एस्टेट व्यवसाय चलाने के लिए करता है तो भी उस गतिविधि से अर्जित आय अपराध की आय ही मानी जाएगी।

अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए पीएमएलए के तहत जारी अनंतिम कुर्की आदेशों (पीएओ) को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला बड़े पैमाने पर हवाला कारोबार और वडोदरा के एक फार्महाउस से यूके स्थित वेबसाइट बेटफेयर डाट कॉम के माध्यम से चलाए जा रहे एक अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जांच से जुड़ा है।

आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ताओं ने सुपर मास्टर आईडी डिजिटल एक्सेस क्रेडेंशियल्स प्राप्त करने और वितरित करने वाले माध्यम के रूप में काम किया, जिससे बिना किसी केवाईसी अनुपालन के कई सट्टेबाजी खाते बनाना संभव हो गया। ये आईडी विदेशों में अवैध रूप से भेजे गए धन का उपयोग करके खरीदी गई थीं और भारत, दुबई, पाकिस्तान और अन्य देशों में गुमनाम सट्टेबाजी नेटवर्क को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं। एजेंसी ने तर्क दिया कि गिरोह ने दिसंबर 2014 और मार्च 2015 के बीच लगभग 2,400 करोड़ का सट्टेबाजी कारोबार किया।

ईडी ने चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया। ईडी ने दावा किया कि ये संपत्तियां अपराध की आय से अर्जित की गई थीं। हालांकि, अभियुक्तों ने कुर्की को चुनौती देते हुए कहा कि पीएओ और कारण बताओ नोटिस उचित नहीं था और क्रिकेट सट्टेबाजी पीएमएलए के तहत अपराध नहीं है। हालांकि, पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलील को खारिज कर दिया और संपत्तियों की कुर्की को बरकरार रखा।

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