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जम्मू-कश्मीर में 122 पाकिस्तानी समेत 131 आतंकी सक्रिय, 45 इस साल ढेर

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发表于 2025-11-27 00:11:18 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

जम्मू-कश्मीर में 122 पाकिस्तानी समेत 131 आतंकी सक्रिय। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। दिल्ली लाल किला बम धमाके से देश में बड़े पैमान पर दहशत मचाने के लिए फैले आतंकी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। ऐसे हालात में जम्मू-कश्मीर में मौजूद विदेशी आतंकवादियों को नाकाम बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उच्च पदस्थ सूत्रों के साथ जम्मू-कश्मीर में इस समय 131 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें से 122 पाकिस्तानी हैं व सिर्फ 9 स्थानीय हैं। यह आंकड़ा घाटी में आतंकियों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। स्थानीय भर्ती में गिरावट के बीच व्हाइट-कालर आतंकी सामने आए हैं।

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि आतंकी संगठन अब स्थानीय युवाओं को आकर्षित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इसी वजह से वे अब पढ़े-लिखे नौकरी पेशा युवाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्हें कट्टरपंथी बनाकर लाजिस्टिक्स, फंडिंग व भर्ती जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

ऐसे पेशेवर \“व्हाइट-कालर आतंकी समाज में रच बस कर सामान्य प्रोफाइल बनाए रखते हुए गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं। ये और भी अधिक खतरनाक हैं।

सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 में अब तक 45 आतंकियों को मार गिराया है। पिछले वर्ष 2024 में कुल 61 आतंकवादी मारे गए थे। इनमें से 45 घाटी में व 16 नियंत्रण रेखा पर मारे गए थे। मारे गए आतंकियों में 21 पाकिस्तानी थे। इस समय जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों पर दवाब बनाकर उन्हें मारने की रणनीति पर काम हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा के साथ अंदरूनी इलाकों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई जारी है।

लाल किला हमले के बाद “व्हाइट-कॉलर” नेटवर्क पर कार्रवाई को तेज कर दिया गया है। दस नवंबर की घटना के बाद जांच में यह सामने आया है कि व्हाइट-कालर माड्यूल में जम्मू-कश्मीर में प्रशिक्षित आतंकी शामिल थे। इसके बाद केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे माड्यूल को तबाह करने के लिए कड़े कदम तेज कर दिए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए व्हाइट-कालर आतंकी इकोसिस्टम को खत्म करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

दिल्ली लाल किला धमाके में इसका स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला है। इसके लिए डाक्टरों जैसे पेशेवर जिम्मेदार हैं। दस नवंबर को हुए इस हमले में कई लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। इस घटना के बाद से जम्मू कश्मीर में सेना, सुरक्षा बल व खुफिया एजेंसियां बेहतर समन्वय बनाकर सक्रिय आतंकियों व उनके लिए काम करने वाले लोगों की पहचान कर रही हैं।
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