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दिल्ली में आतंकी विस्फोट की जांच के बीच अल फलाह यूनिवर्सिटी से कई कश्मीरी डॉक्टर लापता, ATS की कार्रवाई तेज

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发表于 2025-11-27 00:14:03 | 显示全部楼层 |阅读模式
  

फाइल फोटो



प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र बनी अल फलाह यूनिवर्सिटी के अंदर अभी भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। यहां ऐसे डाॅक्टर, स्टाफ व छात्र हैं जो बहुत कुछ जानते हैं लेकिन बता नहीं रहे हैं। बस चुपचाप मौका देखते ही गायब हो रहे हैं। अब इनके अंदर डर है या कुछ और, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
हाफ डे बोलकर हो गए फरार

शनिवार को हाफ डे कहकर यहां से गए 25 डाॅक्टरों में से आठ से 10 डाॅक्टर सोमवार को वापस नहीं लौटे। इनमें से अधिकतर कश्मीरी डाक्टर हैं। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी परिसर में बने रिहायशी कमरों को तीन डाॅक्टर छोड़कर जा चुके हैं। यह तीनों कश्मीरी डाॅक्टर हैं। तीनों ही आतंकी डाॅ. मुजम्मिल, डाॅ. उमर नबी बट और डाॅ. शाहीन वाले टावर में ही रहते थे। इस तरह की गतिविधियों को लेकर केंद्रीय एजेंसी, उत्तर प्रदेश एटीएस व दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एक्टिव हो गई है।
जांच में सहयोग नहीं कर रहे

शनिवार से लेकर सोमवार तक यूपी एटीएस स्काॅर्पियो में यहां करीब 10 बार आ चुकी है। डाॅक्टरों के रिहायशी कमरों से लेकर इनकी कक्षा के छात्रों से भी पूछताछ कर चुकी है। अब पूरा शक हो रहा है कि जो डाॅक्टर गायब हैं, वह कहीं न कहीं किसी न किसी रूप से आतंकियों के संपर्क में थे। बेशक इन डाॅक्टरों को आतंकियों की मंशा के बारे में जानकारी नहीं थी लेकिन ये जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

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इसलिए अब टीमें गायब सभी डाॅक्टरों की तलाश में जुट गई हैं। इन डाॅक्टरों का पूरा पता यूनिवर्सिटी प्रबंधन से ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, गायब डाॅक्टरों ने अपने फोन स्विच  ऑफ कर लिए हैं। इस मामले की जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस को दे दी गई है ताकि वह इन डाॅक्टरों की जल्द तलाश कर सके।

याद रहे इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस भी जांच कर रही है। वह भी यहां कई बार आ चुकी है। आतंकी गतिविधियाें को लेकर मामला जम्मू-कश्मीर में ही दर्ज है और 30 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस यूनिवर्सिटी से डाॅ. मुजम्मिल को पकड़कर ले गई थी। फिर 2923 विस्फोटक बरामद किया गया था।
आतंकियों के आसपास खाली हो रहे कमरे

अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर आतंकियों के फ्लैट के आस-पास रहने वाले डाॅक्टर व अन्य स्टाफ अब बहुत परेशान हो गया है। आए दिन यहां पुलिस व अन्य एजेंसी के लोग आकर पूछताछ करते रहते हैं। इसलिए अब आस-पास के कमरों को खाली करने के लिए प्रबंधन से संपर्क किया जा रहा है।

डाॅ. शाहीन यूनिवर्सिटी परिसर के ब्लाॅक नंबर 15 के फ्लैट नंबर 32 में रहती थी। टावर नंबर 17 के फ्लैट नंबर 13 में डाॅ. मुजम्मिल रहता था। इसी परिसर में डाॅ. उमर नबी बट टावर नंबर 17 के फ्लैट नंबर चार में रहता था। हालांकि, पुलिस पूरे टावर को खंगाल चुकी है लेकिन कुछ नहीं मिला।
आवाजाही हो रही कम

यूनिवर्सिटी में आने वाले लोगों की आवाजाही लगातार कम हो रही है। इनमें मरीज भी शामिल हैं। अब ओपीडी में डाक्टरों की भी कमी है और उनका मन इलाज में नहीं लग रहा है। इतना ही नहीं आतंकी गतिविधि होने की वजह से लोग भी यहां आने से हिचक रहे हैं। इसलिए परिसर को जाने वाली सड़क पर घंटों सन्नाटा पसरा रहता है।

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